मोहब्बत Poetry by Vimmy

मोहब्बत

मजस्म को छू ना मोहब्बत नहीूं होती,
यह तो वो जज्बा है,
की जान चली जाए पर
रूह में उतर जाए।
तूफाूं भी लाख आए,
पर राही ईमान से ना कभी डगमगाए

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